Author name: dr.manojdubey@yahoo.com

अंतर्मन [Inner-voice]

मामा-भांजा

🌺मैं और मेरा भांजा शुभ 🌺 संजय अवस्थी की कलम से… कुछ रिश्ते केवल रक्त से नहीं, भावनाओं से बनते हैं। उनमें अधिकार भी होता है, स्नेह भी, सम्मान भी और एक अद्भुत आत्मीयता भी। मामा और भांजे का रिश्ता ऐसा ही एक रिश्ता है। विशेषकर छत्तीसगढ़ की धरती पर तो भांजे को केवल परिवार […]

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ज्ञान का बोझ

बरसात की पहली तेज़ बारिश थी। सड़क पर पानी भर चुका था। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। अचानक एक तेज़ आवाज़ आई। “धड़ाम!” एक मोटरसाइकिल फिसल गई। लगभग पचपन वर्ष के एक व्यक्ति सड़क पर गिर पड़े। उनके पैर के नीचे बाइक दब गई थी। दर्द से उनका चेहरा तमतमा उठा। वे उठने की

अंतर्मन [Inner-voice]

अकेला

शाम के सात बज चुके थे। बाहर बारिश की बूँदें छज्जे से टपक रही थीं। दरवाज़ा खुला और रवि थके कदमों से घर के भीतर आया। हाथ में सब्ज़ियों का थैला था, कंधे पर दफ़्तर का बैग और चेहरे पर वही रोज़ वाली थकान। “पापा आ गए!” यह आवाज़ तो कभी इस घर में गूँजती

वास्तविक कहानियाँ [ Real-stories ]

जब मैं ज्योतिषी बन गया

जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनकी शुरुआत तो हम करते हैं, लेकिन बाद में लगता है कि वे हमें कहीं और ही ले गईं। मेरी ज्योतिष यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही। यह उन दिनों की बात है जब मैंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करके एम.फिल. में प्रवेश लिया था। विवाह नहीं हुआ

हास्य-व्यंग [ Satire ]

रोटी चोर और ढगे सर की विजय गाथा

यह उन दिनों की बात है जब मैंने कॉलेज में नई-नई नौकरी शुरू की थी। आज की तरह हर फैकल्टी के लिए अलग-अलग केबिन नहीं हुआ करते थे। हम सब एक बड़े से स्टाफ रूम में साथ बैठते थे। वहीं पढ़ाई पर चर्चा होती, वहीं राजनीति पर बहस होती, वहीं चाय की चुस्कियों के साथ

प्रेरणादायक कहानियां [ Inspirational Stories ]

पेड़ और कुल्हाड़ी

एक जंगल में लकड़हारा रोज़ एक पुराने पेड़ के नीचे बैठकर विश्राम करता था। पेड़ उसे छाया देता था। एक दिन लकड़हारे ने उसी पेड़ को काटने का निर्णय लिया। जब कुल्हाड़ी चलने लगी तो पास खड़े पौधे बोले, “इतने वर्षों तक तुमने इसकी सेवा की और यह तुम्हें काट रहा है। क्या तुम्हें दुख

प्रेरणादायक कहानियां [ Inspirational Stories ]

पत्थर का बोझ

एक वृद्ध साधु नदी किनारे बैठे थे। एक युवक उनके पास आया। वह बहुत परेशान था। “गुरुजी, जीवन में मुझे हर जगह धोखा मिला है। मैं लोगों को माफ़ नहीं कर सकता।” साधु ने उसे एक भारी पत्थर दिया। “इसे उठाकर पूरे गाँव का चक्कर लगाओ।” युवक चल पड़ा। थोड़ी देर बाद उसके हाथ दुखने

हास्य-व्यंग [ Satire ]

सुंदरता का सर्टिफिकेट

रायपुर की वह यात्रा आज भी याद आते ही चेहरे पर मुस्कान ले आती है। कुछ वर्ष पहले मैं एक काम से रायपुर गया था। मेरी पत्नी भी साथ थीं। संयोग से उन्हीं दिनों हमारी एक रिश्तेदार, जिन्हें हम यहाँ बुआजी कहेंगे, हमसे मिलने आई हुई थीं। एक दिन बाजार में मेरी मुलाकात मेरे एक

सामाजिक दर्पण [ Social-Reflection ]

क्यूआर कोड का धोखा

इंदौर से दिल्ली जाने वाली ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म छोड़ रही थी। डिब्बे में हल्की सफेद रोशनी फैल रही थी। खिड़की के बाहर शहर की भागती रोशनियाँ पीछे छूटती जा रही थीं।मेरी सीट के ठीक सामने एक लड़का और एक लड़की बैठे थे। दोनों की उम्र मुश्किल से बाइस-तेइस साल होगी। महंगे कपड़े, हाथ में चमकते

अंतर्मन [Inner-voice]

खिड़की जो कहीं नहीं जाती

कमरे में एक खिड़की है,जो खुलती तो है,पर कहीं जाती नहीं। हवा आती है—जैसे किसी और की ज़िंदगी की खबर हो,जो मुझ तक बस छूकर लौट जाती है। मैं यहाँ रहता हूँ,पर “रहना” भी अजीब शब्द है—जैसे कोई किराये का एहसास हो,जिसकी मियाद हर महीने खत्म हो जाती है। दिन में लोग मिलते हैं,बातें भी

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