हास्य-व्यंग [ Satire ]

हास्य और सामाजिक व्यंग से भरपूर लेखन।

हास्य-व्यंग [ Satire ]

रोटी चोर और ढगे सर की विजय गाथा

यह उन दिनों की बात है जब मैंने कॉलेज में नई-नई नौकरी शुरू की थी। आज की तरह हर फैकल्टी के लिए अलग-अलग केबिन नहीं हुआ करते थे। हम सब एक बड़े से स्टाफ रूम में साथ बैठते थे। वहीं पढ़ाई पर चर्चा होती, वहीं राजनीति पर बहस होती, वहीं चाय की चुस्कियों के साथ […]

हास्य-व्यंग [ Satire ]

सुंदरता का सर्टिफिकेट

रायपुर की वह यात्रा आज भी याद आते ही चेहरे पर मुस्कान ले आती है। कुछ वर्ष पहले मैं एक काम से रायपुर गया था। मेरी पत्नी भी साथ थीं। संयोग से उन्हीं दिनों हमारी एक रिश्तेदार, जिन्हें हम यहाँ बुआजी कहेंगे, हमसे मिलने आई हुई थीं। एक दिन बाजार में मेरी मुलाकात मेरे एक

हास्य-व्यंग [ Satire ]

छिपकली कमांडर

छिपकली कमांडर बात उन दिनों की है जब मैं हॉस्टल में रहता था। मेरा रूममेट दुबला पतला एक गुजराती लड़का था, लेकिन हमेशा दूसरों पर रौब दिखाने की कोशिश करता था। इन स्वघोषित सूरमा बहादुर जी की एक कमजोरी थी, छिपकली को देखते ही चेहरे का रंग ऐसे उड़ जाता था, जैसे परीक्षा में नकल

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