अकेला
शाम के सात बज चुके थे। बाहर बारिश की बूँदें छज्जे से टपक रही थीं। दरवाज़ा खुला और रवि थके कदमों से घर के भीतर आया। हाथ में सब्ज़ियों का थैला था, कंधे पर दफ़्तर का बैग और चेहरे पर वही रोज़ वाली थकान। “पापा आ गए!” यह आवाज़ तो कभी इस घर में गूँजती […]
