एक जंगल में लकड़हारा रोज़ एक पुराने पेड़ के नीचे बैठकर विश्राम करता था।
पेड़ उसे छाया देता था।
एक दिन लकड़हारे ने उसी पेड़ को काटने का निर्णय लिया।
जब कुल्हाड़ी चलने लगी तो पास खड़े पौधे बोले,
“इतने वर्षों तक तुमने इसकी सेवा की और यह तुम्हें काट रहा है। क्या तुम्हें दुख नहीं हो रहा?”
पेड़ शांत स्वर में बोला,
“मैं अपना स्वभाव क्यों बदलूँ? मेरा काम छाया देना है।”
लकड़हारे ने यह बात सुन ली।
उसका हाथ रुक गया।
वह शर्मिंदा हो गया।
उसने कुल्हाड़ी नीचे रख दी।
उस दिन वह पेड़ बच गया।
शिक्षा
दूसरों के व्यवहार से अपना चरित्र मत बदलो। अच्छाई की सबसे बड़ी शक्ति उसका निरंतर बने रहना है।
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